जानिए स्कूल कैसे खोले – स्कूल खोलने की प्रक्रिया और मान्यता के नियम

स्कूल कैसे खोले सम्पूर्ण जानकारी? दोस्तों हमारी संस्कृति में सोलह संस्कार माने गए हैं जिसमें विद्यारंभ भी एक प्रमुख संस्कार होता है। बच्चे के जन्म के ढाई या तीन साल के होते ही माता-पिता उसे स्कूल में प्रवेश दिलाने का सोचते हैं जिसके लिए कई माता-पिता उनके बच्चे को पहले ही तैयार कर लेते हैं। हमारे देश में कई तरह की शिक्षा के लिए स्कूल खुले हुए हैं। विद्यालय सरकारी,गैर-सरकारी और निजी प्रकार के होते हैं। आजकल माता-पिता के मन में बच्चे के भविष्य को लेकर कई तरह की चिंताएं होती है जिसके लिए वे चाहते हैं बच्चे को एक अच्छे विद्यालय में दाखिला दिलाया जाए, जहां पर उसके हर तरह के विकास को एक दिशा मिल पाएं।

आजकल कई सरकारी विद्यालयों का संचालन सही प्रकार से नहीं हो पाता। किसी सरकारी विद्यालय में या तो टीचर का अभाव होता है या फिर टीचर पढ़ाने नहीं आते। ऐसी चिंताओं को लेकर माता-पिता बच्चे को एक अच्छे निजी विद्यालय में भेजने का सोचते हैं जहां पर बच्चे के विकास पर ध्यान दिया जाए, इसके लिए कई माता-पिता बच्चो के लिए हर मंहगी फीस भरने को तैयार होते हैं। टीचर की कमी को लेकर तो सरकार ने कई विद्यालयों का एकीकरण कर दिया है।

कई सरकारी विद्यालयों जहां पर सरकार के पास कोषों की कमी,रिजल्ट आदि सही प्राप्त नहीं होने की समस्या है ऐसे विद्यालयों का दायित्व भी सरकार ने निजी क्षेत्र को सौंपने का सोचा है। ऐसे में आप स्वयं यदि टीचिंग फील्ड से हैं तो आप भी अपना एक निजी विद्यालय खोल सकते हैं, जिसमें आपकी योजना बच्चो के विकास को लेकर एक नवीन प्रकार की हो। दोस्तों हर तरह की मानसिक बुद्धि वाले बच्चो के आधार पर शिक्षा के लिए विद्यालय होते हैं जैसे मंदबुद्धि,मुखबधिर आदि बालको के लिए और एक वो जो सामान्य बालकों के लिए होता है। यदि आप एक सामान्य स्कूल खोलना चाहते हैं, तो आज हम आपको इसकी एक अच्छी योजना बताने वाले हैं, एक बात यहां बतादे कि टीचिंग फील्ड से सम्बन्धित होने के कारण आपको हम बेहतर से बेहतर योजना बताने की कोशिश करेंगे।

स्कूल खोलने की प्रक्रिया और नियम

सबसे पहले तो आपको सोचना होगा कि आपको किस प्रकार का विद्यालय खोलना चाहते हैं जैसे कि प्ले स्कूल, प्री प्राइमरी स्कूल और प्राइमरी स्कूल आदि। एक अच्छे बिजनेस के लिए मुझे जहां तक लगता है सबसे पहले आपको प्ले स्कूल या प्री प्राइमरी स्कूल खोलनी चाहिए। आप जानते हैं कि हमारे भारत की जनसंख्या दिन-दिन बढ़ती जा रही है। माता-पिता निजी विद्यालय जिसमें उनका बच्चा आसानी से खेलता हुआ समायोजित हो जाए और रोये नहीं यही सोचकर वो बच्चे को प्ले स्कूल में भेजने का सोचते हैं।

सबसे पहले आपको एक विद्यालय प्रबंधक बनने के लिए प्रशिक्षण करने के बाद सर्टीफिकेट लेना अनिवार्य होता है। सबसे पहले 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आ बी.एस.टी.सी. या डी.एल.एड. कर सकते हैं जो दो या तीन वर्षीय होता है। इसे करने के लिए आपको इसका प्री एक्जाम क्वालिफाई करना होता है। आप स्नातक करने के बाद बी.एड. भी कर सकते हैं इसके लिए भी आपको प्री एक्जाम क्वालिफाई करना होता है। ये एक या दो वर्ष का प्रशिक्षण होता है। ये होने के बाद आपको इग्नू से विद्यालय प्रबंधन का कोर्स करना होता है। यदि आपने ये सब कर लिया तो उसके बाद आपके पास पांच वर्ष तक का स्कूल में पढ़ाने का अनुभव भी होना चाहिए।

स्कूल खोलने के नियम और कुछ जरुरी प्रक्रिया

सबसे पहले स्कूल का रजिस्ट्रेशन कराना होगा जो अनिवार्य है इसकी जानकारी भी आपको आगे दी जाएगी। इसके बाद आपके पास जगह होनी चाहिए। यदि आपके स्वयं की जगह ऐसे फील्ड में है जो आवासीय क्षेत्र और शोर शराबे से दूर है तो आप वहां अपनी स्कूल बनवा सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आप किराये पर कोई बिल्डिंग ले तो आप ऐसे भी ले सकते हैं।

यदि आप राजस्थान से हैं या आपके वहां जमीन से संबधित ये रूल है कि आपको एक एकड से कम जमीन का रूपांतरण नहीं कराना होगा तो आप उस जगह से संबंधित इस रूल को जरूर फाॅलो करें। आपको प्री प्राइमरी स्कूल खोलनी है तो एक छोटी सी बिल्डिंग जिसमें 3 से 4 रूम या एक हाॅल हो उसकी जरूरत पड़ती है साथ ही आपको कुछ अच्छे खिलौने का इंतजाम करना होगा।

जहां तक प्राइमरी विद्यालय की बात है आपको 5 कमरे कक्षा के लिए, 1 कमरा आॅफिस के लिए, 1 कमरा लाइब्रेरी के लिए और 1 कमरा स्टाफ रूम के लिए होना चाहिए साथ ही टाॅयलेट एवं बाथरूम की व्यवस्था होनी चाहिए। ये विद्यालय 1000 या 1200 स्वायर फीट की जमीन पर बन सकता है, उसके बाद आप पर निर्भर करना है कि आप उसमें किस तरह की फेसिलिटिस रखना चाहते हैं।

इसके बाद आपको फर्नीचर्स की जरूरत पड़ेगी जिनमें आपके आॅफिस के लिए टेबल, कुछ कुर्सियां और कक्षाओं में विद्यार्थीयों के लिए बस्ते रखने के लिए टेबल आदि की जरूरत पड़ती है। ये आपको आपके नजदीकी फर्नीचर स्टोर से मिल जाएंगे या आप इन्हें बनवा भी सकते हैं। यदि आपके कुल छात्र 100 हैं तो आपको बस्ते रखने के लिए 33 या 34 ऐसे टेबल की जरूरत होगी जो हर तीन छात्र के काम आ सके।

इनमें आपका खर्चा 25 से 30 हजार आ जाएगा। इसके बाद आपको 5 कुशल टीचर्स की आवश्यकता होगी। आपको विद्यालय के रिकाॅर्ड आदि के लिए कुछ महत्वपूर्ण रजिस्टर जैसे विद्यार्थी विवरण रजिस्टर, विद्यार्थी उपस्थिति रजिस्टर, अध्यापक आदि के लिए रजिस्टर की जरूरत होगी।

स्कूल रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया और मान्यता के नियम

दोस्तों प्राथमिक स्कूल खोलने के लिए सबसे पहले आपको एक संस्था बनानी होगी, जो कोई भी आठ या दस सदस्य मिलकर बना सकते हैं। उसके बाद आपको एक अच्छे उद्देश्य के साथ प्रस्ताव को लेकर रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन के लिए जाना होगा, जिसमें आपके 11 हजार रुपये खर्च होते हैं। उसके बाद आपकी इस संस्था का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा, आपको आपकी संस्था का सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। उसके बाद आपको आपके विद्यालय की अध्यापक आदि की टीम बनानी होगी और एक मिटिंग करनी होगी।

ध्यान रहे दो अध्यापक बी.एड. धारी होने चाहिए। उसके बाद अप्रैल-मई में नए विद्यालय हेतु आॅनलाइन पंजीकरण होते हैं उसमें आपको एप्लाई करना है जिसमें आपके 2 हजार के आस-पास खर्च होंगे। उस फाॅर्म को भरने के बाद आपको आपके संस्था के सर्टिफिकेट की काॅपी साथ सलग्न करके डी.ई.ओ. कार्यालय में जमा करानी होगी जहां आपके 10 हजार रुपये खर्च होंगे। ये सब करने के कुछ दिन बाद आपके विद्यालय में 4 या 5 कर्मचारी देखने के लिए आंएगे, वो आपके सारे डाॅक्यूमेंट चेक करेंगे और देखने के बाद ओके कर देंगे। आपके विद्यालय का सम्पूर्ण कार्य पूरा हो जाएगा। उसके अगले दिन से आप अपना विद्यालय प्रारंभ कर सकते हैं।

किस आधार पर स्कूल टीचर को लें

आपको टीचर चुनने के लिए सबसे पहले उनकी कुशलता और प्रशिक्षण सर्टिफिकेट को जांचना और परखना होगा। आपको एक बात पता होगी कि कई विद्यालयों में 12 वीं या 10वीं उत्तीर्ण ही पढ़ाने लग जाते हैं। हाल ही में कई राज्यों में सरकार ने एक डिप्लोमा शुरू किया है, जिसे करने के बाद ही विद्यालय में पढ़ाया जा सकता है। या तो ये डिप्लोमा हो या संबंधित प्रशिक्षण की डिग्री जैसे बी.एड., बी.एस.टी.सी., डी.एल.एड. आदि। उसके बाद आपको टीचर के व्यवहार को और अनुशासन को देखना होगा। उसके उद्देश्य को देखना होगा कि उसके मन में शिक्षा देना पैसे के लिए जरूरी है या सेवा के लिए वो इसे अपना धर्म मानता है।

स्कूल की फीस कितनी रखनी होगी

मेरी रिसर्च के अनुसार यदि आपके स्कूल में हर कक्षा में 20-20 छात्र हैं, तो आपको निम्नानुसार फीस रखनी होगी-

  • पहली कक्षा- 7000 सालाना
  • दुसरी कक्षा- 7500 सालाना
  • तीसरी कक्षा- 7800 सालाना
  • चैथी कक्षा- 8000 सालाना
  • पांचवी कक्षा- 8300 सालाना

यदि आप उच्च प्राथमिक स्कूल खोलना चाहते हैं, तो आपको एक और परमिशन लेनी होती है, उसके बाद कक्षा के हिसाब से आप फीस बढ़ा ही सकते हैं। साथ ही आपको 5 से अब 8 टीचर की व्यवस्था करनी होगी।

एडमिशन के लिए एडवर्टाइजमेंट कैसे करें

अपने स्कूल के एडवर्टाइजमेंट के लिए आपको सबसे पहले स्कूल का जो भी नाम है उस सहित अच्छे पेंपलेट्स छपवाने होंगे जिसमें आपको ऐसे ज्ञानवर्धक शब्दों का प्रयोग करें जिससे कि देखने वाले आकर्षित होकर सोचे कि भविष्य की सही दिशा आपके विद्यालय में दी जाएगी।

आपको उन पेंपलेट्स को न्यूजपेपर आदि के माध्यम से बांटना होगा। साथ ही आप जिस भी क्षेत्र में विद्यालय खोल रहे हैं उसके नजदीकी गांव या आबादी में जाकर घर-घर तक जाएं और उनसे कंसल्ट करें। जाने की उनके परिवार में बच्चे कितने हैं, उसके बाद उन्हें अपने विद्यालय के बारें में बताए।

आपके शहर का यदि कोई टीवी चैनल चलता हो तो उसमें आप आपके विद्यालय का एड. दे। आप जिस भी घर पर एड. करने जा रहे हैं उनके सम्पर्क नम्बर जरूर लेकर आएं क्योंकि एक बार आपको पुनः उन्हें काॅल करके कंसल्ट करना होगा।

कैसे चलाएं स्कूल और क्या योजनाएं होगी

स्कूल के उचित संचालन के लिए अध्यापकों को सबसे पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। आपको उचित समय पर प्रार्थना सभा रखनी होगी जिसमें आप कई तरह की गतिविधियां संचालित करेंगे जिनमें बच्चे कुछ कविताएं पढ़ेंगे या कुछ प्रश्न या अन्य प्रतिभा को लेकर प्रस्तुतियां देंगे।

  • उसके बाद विषय के आधार पर कालांश 20 मिनट या 25 मिनट में बंटेंगे।
  • उनमें अध्यापक को सबसे पहले कक्षा में जाने के बाद बच्चों की उपस्थिति लेनी होगी और अच्छे से हर कालांश में सभी को पाठ्यक्रम के आधार पर उचित शिक्षण कराना होगा।
  • कुछ समय अंतराल का लंच टाइम होगा जिसमें सभी बच्चे हाथ धोकर और ईश्वर की एक आराधना के बाद एक साथ खाना खाऐंगे।
  • पुनः उनका अध्यापन कार्य शुरू होगा जिसमें खेल और मनोरंजन के आधार पर उन्हें पढ़ाया जाएगा।
  • बच्चो के सेहत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। किसी भी बच्चे को बीमार होने पर इलाज पर और अभिभावकों को सूचित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
  • छुट्टी आदि होने पर बच्चों को वाहन आदि के माध्यम से सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उन्हें घर पंहुचाया जाएगा या अभिभावक के आने पर ही उन्हें उनके साथ भेजा जाएगा।
  • इतना ही नहीं समय पर बाल सभाएं एवं महापुरूषों की जयन्तियों और खेल सप्ताह आदि को भी मनाया जाएगा।

कितना फायदा होगा स्कूल खोलने पर School Profit Margin

यदि हम लाभ की बात करें, तो मान लिजिए आपके विद्यालय में कुल छात्र 100 हैं और प्रत्येक कक्षा में 20-20 छात्र हैं। इसके हिसाब से पहली कक्षा के कुल विद्यार्थियों की फीस 140000 रुपये, दुसरी कक्षा के 150000 रुपये, तीसरी कक्षा के 156000 रुपये, चैथी कक्षा के 160000 रुपये और पांचवी कक्षा के 166000 रुपये होते हैं, तो कुल 772000 रुपये होते हैं।

यदि आप प्रति माह अध्यापक के 7 हजार रुपये पेमेंट करते हैं, तो सालाना पांच अध्यापकों को 420000 रुपये होते हैं और बिजली बिल आदि खर्च माने तो प्रतिमाह के 10 हजार मान सकते हैं, तो ये सालाना के एक लाख होते हैं। यानि सभी को निकालकर आपके पास 2 लाख 52 हजार रुपये बचते हैं। यदि आप राउंडफिगर में भी और खर्च माने जैसे अध्यापक के वेतन में बढ़ोतरी करना, तो आप 50 हजार और निकाल ले। इसके बाद भी सालाना हिसाब से आपके पास 2 लाख 2 हजार रुपये बचते हैं, जो आपका लाभ होगा। इसके हिसाब से आप महिने के कम से कम 20 हजार तक कमा सकते हैं। बस एक कुशल प्रबंधन आपको करना होगा।

इन बातों पर बरतनी होगी सावधानियां

सबसे पहली ध्यान रखने वाली बात जो एक अच्छे विद्यालय का गुण होता है अनुशासन उसे आपको ध्यान में रखकर चलना होगा। आपको विद्यालय में अनुशासन के साथ-साथ नियंत्रण रखना होगा। केवल विद्यार्थी ही अनुशासन नहीं रखेंगे बल्कि आपको और आपके स्टाफ को भी अनुशासन का पूरा ध्यान रखना होगा। क्योंकि बच्चे हमेशा अनुकरण द्वारा सीखते हैं, वो एक गिली मिट्टी की तरह होते हैं उनमें सही गलत की पहचान नहीं होती है इसीलिए आपको हमेशा अनुशासित रहना जरूरी होगा।

आपके व्यक्तित्व में आपको सुधार करना होगा। आपका पहनावा एक शिक्षक की तरह होना चाहिए और आपके पढ़ाने का तरीका आदि भी अनुशासित होना चाहिए। साथ ही आपमें बात करने की मिठास होनी चाहिए और सभ्य शब्दों एवं ज्ञानवर्धक शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।

उसके बाद बच्चो पर कभी भी हाथ नहीं उठाएं क्योंकि ये कानून के खिलाफ है। आपको मन से शांत रहना होगा और बच्चो के साथ प्यार से पेश आना होगा। एक विद्यालय चलाने के लिए आपको समय के प्रति पाबंद रहना होगा। अपने विद्यालय रिकाॅर्ड का ध्यान रखना होगा।

आर.टी.ई. एक्ट के तहत आपको अपने विद्यालय की 25 प्रतिशत शीटें आरक्षित रखनी होगी। आपको टीचर के अध्यापन को हमेशा जांचना होगा ये आप पर निर्भर है। आपको अपने विद्यालय में अच्छे से अच्छे टीचिंग मेथड अपनाने होंगे।

इन सभी बातों का ध्यान रखने के बाद आप एक अच्छे स्कूल के प्रबंधक बन पायेंगे। तो दोस्तों आज आपने जाना कि किस प्रकार आप एक स्वयं का विद्यालय खोल सकते हैं।

9 thoughts on “जानिए स्कूल कैसे खोले – स्कूल खोलने की प्रक्रिया और मान्यता के नियम

    • Thanks for contacting hindily sanjay ji , we have tried our best to provide all the essential info please go through the article and follow the procedure.
      Thanks

    • हिंदली को संपर्क करने के लिए धन्यवाद् पंकज जी ,कृपया दिए गए आर्टिकल को पूरा पढ़ें इसमें हमने स्कूल खोलने और परमिशन से जुडी पूरी जानकारी दी है , धन्यवाद्

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